जन्माष्टमी महोत्सव के इस पावन अवसर पर Kabeer Ji Maharaj ने एक ऐसा प्रवचन दिया जो हर उस व्यक्ति के लिए है जो जीवन में समस्याओं के बोझ तले दबा हुआ महसूस करता है। उनका संदेश सरल लेकिन गहरा था —
"समस्या होती है ना तो उसका समाधान ढूंढते-ढूंढते आता है। अधिकतर मामलों में अगर थोड़ा सा भी हम गौर से देखने की कोशिश करें तो हमें समझ में आएगा कि समस्या है ही नहीं।"
— Kabeer Ji Maharaj | जन्माष्टमी महोत्सव प्रवचन | Rajdharma 3.0
Kabeer Ji Maharaj — जन्माष्टमी महोत्सव में मंच पर, हजारों श्रद्धालुओं के बीच
हम समस्या क्रिएट कर रहे हैं — मन का खेल
Kabeer Ji Maharaj के अनुसार अधिकांश समस्याएं बाहर नहीं, हमारे भीतर जन्म लेती हैं। हमारा मन चीजों को fabricate करता है। ऐसी कल्पनाएं करता है जिनका अस्तित्व नहीं है, जिनका कोई rational आधार नहीं है।
एक नकारात्मक विचार आता है और हम उसे इतना चर्न करते हैं कि वो जिंदगी के हर पहलू में फैल जाता है।
किसी की अच्छाई में भी हमें अपनी समस्याएं नजर आने लगती हैं। शुभ देखकर चिंता होने लगती है।
भूत, प्रेत, तंत्र, मंत्र — जब चिंतन अधोगामी होता है तो अदृश्य समस्याएं बढ़ती चली जाती हैं।
जहाँ ध्यान जाता है वो expand होता है। संदेह पर ऊर्जा लगाओगे तो संदेह बढ़ेगा।
जन्माष्टमी महोत्सव — मंच पर Kabeer Ji Maharaj और गणमान्य अतिथि
अदृश्य समस्या का अदृश्य समाधान
Kabeer Ji Maharaj ने कहा कि जब समस्या ही अदृश्य है — यानी सिर्फ संदेह और कल्पना है — तो समाधान भी अदृश्य ही रहेगा। लोग ज्योतिषों के पास, तांत्रिकों के पास भागते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि समाधान कहीं बाहर है।
"संदेह है, कल्पना है — संदेह और कल्पनाओं के समाधान नहीं होते। संदेह और कल्पना धीरे-धीरे रुगणी होते चले जाते हैं।"
— Kabeer Ji Maharaj | Aatmik Intelligence | Rajdharma 3.0
Kabeer Ji Maharaj — पुस्तक भेंट और सम्मान समारोह, जन्माष्टमी महोत्सव
ऑथेंटिसिटी — जीवन का सबसे बड़ा धर्म
Kabeer Ji Maharaj के अनुसार जीवन की सबसे बड़ी समस्या तब होती है जब हम अपने साथ ही बेईमान हो जाते हैं। अपनी भावनाओं को गलत तरीके से identify करते हैं, उन्हें fabricate करते हैं।
ऑथेंटिसिटी ही जीवन है
फैब्रिकेशन नहीं। बनाया हुआ कुछ नहीं होना चाहिए। दुनिया के साथ कभी-कभी समझौता हो सकता है — लेकिन अपने साथ नहीं।
अपने साथ ईमानदारी
जो अपने साथ बेईमान है वो खुद के साथ ही छेड़छाड़ कर रहा है। अपनी भावनाओं को देखो, झाँको, खोदो उनको।
विचारों को ट्रैक करो
कहाँ से आया विचार? क्यों आया? जब उनका आधार न मिले तो वो useless हो गया — उसे छोड़ दो।
Loose करो अपने आप को
छोड़ना, loose करना अपने आप को बहुत जरूरी है। Highest frequency पर vibrate करने के लिए flow जरूरी है।
जन्माष्टमी महोत्सव — हजारों श्रद्धालुओं का उत्साह और भक्तिभाव
आप एक कलाकार हो — Playground में खेलो
Kabeer Ji Maharaj का एक शक्तिशाली विचार — "यह पूरा का पूरा playground है। आप एक कलाकार हो।" जब कलाकार स्वतंत्र नहीं होगा, अपने भाव में नहीं आएगा, तो वो कैसे flow करेगा? कैसे highest frequency पर vibrate करेगा?
"एक जिंदगी है। वह जिंदगी भावनाओं से, विचारों से पूरी तरीके से overloaded रहेगी तो आपकी projectile force कम हो जाएगी। आप अपने स्वैग में, अपने style में, अपनी प्रकृति में खेल ही नहीं पाओगे।"
— Kabeer Ji Maharaj | जन्माष्टमी महोत्सव | Aatmik Intelligence
Kabeer Ji Maharaj — जन्माष्टमी महोत्सव में गणमान्य अतिथियों के साथ
स्वधर्म — सीढ़ी नहीं, फाउंडेशन है
Kabeer Ji Maharaj का सबसे महत्वपूर्ण संदेश था स्वधर्म पर। उन्होंने कहा कि जिंदगी एक constant कला है। परिवारों का विखंडन, संस्कृति का हरण — हम धारा से टूट गए हैं। सनातन धर्म का विस्तार करना है लेकिन पहले धर्म को धारण करना होगा, सिर्फ शब्द नहीं।
स्वधर्म — आधार
स्वधर्म सीढ़ी नहीं है — फाउंडेशन है। पहले अपने आप को स्थापित करो।
गृह धर्म
जब आप स्वयं स्थापित होंगे तब परिवार के प्रति धर्म ठीक से कर पाओगे।
समाज धर्म
समाज के लिए धर्म — तभी संभव जब नींव मजबूत हो।
राष्ट्र धर्म
राष्ट्र के लिए जिम्मेदारी — स्वधर्म से उठने वाली ऊर्जा।
सर्वोच्च राजधर्म
राज में, व्यवस्था में, प्राकृतिक व्यवस्था में स्थापित होना — Rajdharma 3.0।
Kabeer Ji Maharaj — जन्माष्टमी महोत्सव, संध्या और रात्रि के विशेष सत्र
धर्म के साथ लयबद्ध होना
"धर्म स्थापित है। सहज स्थापित है। बस उस धर्म के साथ लयबद्ध होने की जरूरत है — उसके rhythm में आने की जरूरत है। उसकी rhythm से टूट जाते हैं तो समस्याएं जन्म लेती हैं।"
— Kabeer Ji Maharaj | जन्माष्टमी महोत्सव | Vichar Se Vyavastha Tak
जन्माष्टमी महोत्सव — भजन और कीर्तन का दिव्य वातावरण
Kabeer Ji Maharaj — जन्माष्टमी महोत्सव में एकाग्र और प्रसन्न
Kabeer Ji Maharaj — माइक पर, उपस्थित गणमान्यों के साथ शक्तिशाली संवाद
समस्याएं क्रिएट नहीं करना है।
ऑथेंटिसिटी ही जीवन है।
अपने चिंतन को स्वतंत्र, निष्पक्ष और ईमानदार रखो।
स्वधर्म स्थापित करो — बाकी सब अपने आप ठीक होता है।
बाकी तो महादेव सब ठीक कर ही रहे हैं। — Kabeer Ji Maharaj 🙏