Kabeer Ji Maharaj — भगवा में, प्रकृति की लय में। Vichar Se Vyavastha Tak की जीवंत प्रतिमूर्ति।
भारत के युवाओं के सामने एक ऐसा संकट खड़ा है जैसा पहले कभी नहीं था। पुराना रास्ता — खूब पढ़ो, नौकरी पाओ, पैसा कमाओ — उनकी आँखों के सामने ढह रहा है। AI उनके profession को automate कर रही है। Wealth कुछ हाथों में सिकुड़ती जा रही है। और अपनी सनातनी पहचान को लेकर वे खुद से ही अनजान हैं।
इस समय में Kabeer Ji Maharaj — Spiritual Leader, Author of Rajdharma 3.0 और एक तीक्ष्ण Social Thinker — एक सीधा लेकिन क्रांतिकारी विचार लेकर आते हैं: युवाओं को इकट्ठा करो, सबसे गहरे सवाल पूछो, और बिना लाग-लपेट के जवाब दो।
"25 साल में बहुत सारी संभावनाओं पर हमें पहुंच जाना चाहिए था। लेकिन हमारा एकमात्र लक्ष्य है — पैसा। इसके अलावा हमारा कोई लक्ष्य नहीं है।"
— Kabeer Ji Maharaj | युवा शास्त्रार्थ | Rajdharma 3.0
Kabeer Ji Maharaj — शिवलिंग के समक्ष समर्पण। "धर्म के साथ लयबद्ध होने की जरूरत है।"
पैसे का जाल — उल्टा क्रम
Kabeer Ji Maharaj सबसे पहले एक ऐसी सच्चाई रखते हैं जो काटती है: कमरे में बैठे हर युवा का — 25+ उम्र के — एकमात्र focus है पैसा। Job हो, business हो, कोई support करे, किसी group से जुड़ें — लेकिन ultimately सब कुछ एक ही लक्ष्य की तरफ जाता है।
वे यह नहीं कहते कि पैसा नहीं चाहिए। वे कहते हैं — approach गलत है। और यहाँ वे एक ऐसा mythological insight देते हैं जो दिल में उतर जाता है:
"लक्ष्मी जी की सवारी कौन होती है? उल्लू। जब भी आपके पास instant money आएगा, आप उल्लू बनना शुरू हो जाएंगे। इसीलिए लक्ष्मी जी की सवारी उल्लू है।"
— Kabeer Ji Maharaj | युवा शास्त्रार्थउल्लू — अंधेरे में बुद्धिमान, रोशनी में अंधा। Lakshmi Ji की सवारी उल्लू क्यों है? क्योंकि जिन्हें suddenly, बिना समझ के पैसा मिलता है — वे रोशनी में अंधे हो जाते हैं। इसलिए most youth का structure है:
पहले: लक्ष्मी (पैसा)
किसी भी तरह पैसा पहले चाहिए — job हो, business हो, sponsor हो। Lakshmi को पहले target करना।
फिर: दुर्गा (शक्ति)
पैसे से शक्ति खरीदने की कोशिश — connections, power, influence — wealth के बाद।
अंत में: सरस्वती (ज्ञान)
ज्ञान और समझ सबसे आखिर में — जब 'टाइम होगा'। लेकिन वो टाइम कभी नहीं आता।
परिणाम: खोखली सफलता
बिना नींव के बनी इमारत — जो किसी भी झटके में ढह जाती है। पैसा आया तो उल्लू बनाता है।
AI और महाजॉब-विनाश — क्या तुम देख सकते हो?
Bharat Shakti Sangh — सेवा कार्य, बच्चों को भोजन। "समाज को सहयोगी बनाना पड़ेगा।" — Kabeer Ji Maharaj
Kabeer Ji Maharaj कमरे में बैठे युवाओं से एक devastating सवाल पूछते हैं: "जो वर्तमान conditions हैं — आप जो भी काम कर रहे हो — क्या मशीनें उस काम को कर सकती हैं?"
Event management? Catering? Software engineering? वे एक-एक करके दिखाते हैं कैसे machines पहले से ये कर रही हैं या जल्द करेंगी। लेकिन असली insight machines के बारे में नहीं — Human Intelligence की nature के बारे में है:
"आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का मतलब क्या है? कि हमारे पास जो Human Intelligence थी — उसकी सबसे बड़ी capability थी कि हम programs बना सकते थे। अब Machine हम सबसे सीख रही है।"
— Kabeer Ji Maharaj | युवा शास्त्रार्थ | Aatmik IntelligenceMachines work round the clock. हम average 2-3 productive घंटे।
AI automate कर रही है: Coding, Design, Legal, Video, Accounting — सब कुछ।
Permanent govt jobs — क्योंकि काम ही नहीं बचा machines के आने के बाद।
3D Printing से mic, camera, building — कुछ भी। Factory workers → Robots।
Generative AI ने creativity खत्म की। AI ने programming खत्म की। Design sense को खत्म किया। Driverless cars आ रही हैं, Drone delivery आ रही है। Labour-centric हर काम machine कर लेगी। और जो "safe" समझते थे — coding, design, legal writing — वो भी खतरे में हैं।
"तुम्हारी generation के साथ सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि तुम देख ही नहीं सकते कि अगले छह महीने में दुनिया कहां जा रही है। हर दिन machine सीख रही है। हमारे काम खत्म हो जा रहे हैं।"
— Kabeer Ji Maharaj | युवा शास्त्रार्थ | Rajdharma 3.0₹77 लाख करोड़ की Economy — तुम कहाँ खड़े हो?
लखनऊ — "व्यवस्थाएं हमारे ही सपोर्ट से चलने वाली हैं।" Kabeer Ji Maharaj का समाज से जुड़ाव।
Kabeer Ji Maharaj युवाओं के सामने एक आईना रखते हैं। भारत — दुनिया की 5th Largest Economy — की GDP 2024-25 में लगभग ₹77 लाख करोड़ है। लेकिन इस wealth पर नियंत्रण किसका है?
Top 1% भारतीय 40% national wealth control करते हैं।
Top 10% पूरी 90% economy control करते हैं।
केवल 16 भारतीयों के पास 60 करोड़ लोगों से ज़्यादा wealth है।
Digital marketing industry का आकार — जो आपके impressions बेचती है।
"जो छह-सात घंटे हम लोग अंगूठा घिसते हैं — फायदा किसको है? वो बेचते क्या हैं? वो हमारे और आपके impressions ही तो बेच रहे हैं। Engagement is the product।"
— Kabeer Ji Maharaj | युवा शास्त्रार्थ | Vichar Se Vyavastha TakBusiness के नाम पर युवा उन systems के instruments हैं। Job के नाम पर उनके गुलाम। Delivery boy machine के instruction follow करता है। Social media user का attention एक product है जो बेचा जा रहा है।
समाधान? एक-दूसरे के लिए सहयोगी बनो। अपनी community में एक-दूसरे का business refer करो, support करो। "हम क्यों expect करें कि हमें आकर support कोई और करेगा? हम आपस में एक-दूसरे के लिए सहयोगी हो सकते हैं।"
सरस्वती → दुर्गा → लक्ष्मी — जीवन का सही क्रम
सनकुआ धाम — तालाब, वृक्ष और सूर्यास्त। "धर्म स्थापित है — बस उसके साथ लयबद्ध होना है।"
यह युवा शास्त्रार्थ का सबसे शक्तिशाली philosophical क्षण है। Kabeer Ji Maharaj तीनों देवियों को — जिन्हें हम worship करते हैं — एक practical success framework में map करते हैं। और sequence बताते हैं जो non-negotiable है:
माँ सरस्वती
सवारी: सफेद हंस (White Swan)
ज्ञान · समझ · दूरदृष्टि। हंस ऊँचाई पर, stable, long distance उड़ता है। सरस्वती वो है जो ऊपर से सब देखती हैं — स्पष्ट, निष्पक्ष, दूरगामी। यही पहला गुण जो युवा में होना चाहिए।
माँ दुर्गा
सवारी: शेर (Lion)
शक्ति · क्षमता · किलाबंदी। दुर्ग = Fortress। शेर जिस area में रहे, वहाँ कोई नहीं जाता। समझ के बाद शक्ति — लोगों को, संसाधनों को mobilize करने की क्षमता। बिना समझ की शक्ति अंधी है।
माँ लक्ष्मी
सवारी: उल्लू (Owl)
समृद्धि · सौभाग्य · प्रचुरता। उल्लू अंधेरे में बुद्धिमान, रोशनी में अंधा। समझ और शक्ति के बाद लक्ष्मी स्वाभाविक आती है। पहले लक्ष्मी → instant wealth → उल्लू बनना।
"हम पहले लक्ष्मी जी की उपासना कर रहे हैं, फिर दुर्गा माँ की, फिर सरस्वती माँ की — यही तो है — इसका मतलब है कि हम देवी की उपासना भी उल्टे क्रम में कर रहे हैं।"
— Kabeer Ji Maharaj | युवा शास्त्रार्थ | Rajdharma 3.0वे एक driving analogy देते हैं: अगर car में केवल accelerator पर पैर रखो तो टकराओगे। Balance कहाँ से आएगा? समझ से। सरस्वती → दुर्गा → लक्ष्मी — यही एकमात्र sequence है जो टिकाऊ success देता है।
सनातन धर्म क्या है? — पूर्ण Framework
युवा शास्त्रार्थ का एक powerful moment: Kabeer Ji Maharaj कमरे से पूछते हैं — "तुम सनातनी क्यों हो?" सन्नाटा। अधिकांश युवा जानते हैं कि वे सनातनी हैं — महसूस करते हैं — लेकिन articulate नहीं कर सकते। कभी सिखाया ही नहीं गया।
"अभी हमारे पास एक सवाल का जवाब नहीं था — अस्तित्व खतरे में आ गया — कि हम सनातनी क्यों हैं। कभी हमने अपने आप से पूछा ही नहीं।"
— Kabeer Ji Maharaj | युवा शास्त्रार्थ | Vichar Se Vyavastha Takफिर वे एक remarkably structured, accessible introduction देते हैं:
वेद (Vedas) — श्रुति (Shruti)
सबसे प्राचीन: ऋग्वेद। फिर यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद। "श्रुति" = सुना हुआ। ध्यान की गहन अवस्था में ऋषियों ने जो frequencies perceive कीं — वही वेदों में compile हुईं। चार भाग: संहिता, ब्राह्मण, अरण्यक, उपनिषद।
स्मृति (Smriti) — 18 स्मृतियाँ
वेदों के ज्ञान की व्याख्या और application। मनुस्मृति से 16 संस्कार — पहले अंगिरा जी ने 33 दिए, मनु जी ने उस समय के लिए 16 में संकलित किए। "16 संस्कार बहुत वैज्ञानिक हैं — कुछ भी पाखंड नहीं।" — Kabeer Ji Maharaj
पुराण (Puranas) — Encrypted Wisdom
कहानियाँ हैं — लेकिन सिर्फ कहानियाँ नहीं। शिव पुराण, विष्णु पुराण, देवी पुराण — हर पुराण में एक hidden, encrypted message है। पुराणों पर literally वाद-विवाद करना = point miss करना। विशेष अध्ययन से decode होती हैं।
आगम (Agamas) — Temple Science
मंदिर निर्माण का विज्ञान — geometric, astronomical। प्राण प्रतिष्ठा कैसे होती है। मंदिर की orientation कैसे तय होती है। यह physics है, mysticism नहीं।
दर्शन (Darshanas) — छः Philosophy Schools
सारी Sanatan knowledge यहाँ synthesize होती है। जो सनातन दर्शनों का अध्ययन करता है, उन्हें शाश्वत मानता है, या उन पर विश्वास रखता है — वही सनातनी है। यह religion नहीं — civilization का complete operating system है।
धर्मो रक्षति रक्षिता — वो नियम जो सब govern करता है
चाकू फल काट सकता है — गला भी काट सकता है। चाकू का गुणधर्म है। वो तुम्हारा नहीं — उसकी nature का है। Dharma ऐसे ही काम करती है।
Gravitational force तुम्हें बिठाए रखती है — छत से कूदो तो मार देती है। Same force, different alignment with it। Dharma identical है।
AI ride करो — अगला पहुंच जाओगे। Ignore करो — खत्म हो जाओगे। यह law है, opinion नहीं।
सरस्वती→दुर्गा→लक्ष्मी के क्रम में जियो — Dharma तुम्हारी रक्षा करती है। उल्टा जियो — Dharma तुम्हें destroy करती है।
"धर्म के अनुकूल चलेंगे — तो हम उसके सहयोगी हो जाएंगे, धर्म आपके लिए सहयोगी हो जाएगा। धर्म के विपरीत चलोगे — धर्म आपको मार देगा।"
— Kabeer Ji Maharaj | युवा शास्त्रार्थ | Rajdharma 3.0Dharma यहाँ religion नहीं है। यह हर चीज़ की intrinsic nature है — वो नियम जो सारी reality को govern करता है। इसके साथ चलो — यह तुम्हें sustain करती है। इसके विरुद्ध जाओ — यह तुम्हें destroy करती है। यह mysticism नहीं — यह physics applied to human life है।
"अगर हमने अपनी समझ को विकसित नहीं किया — या तो आप खत्म हो जाओगे, या इस पर सवार हो जाओगे। यह समय आपके लिए बिल्कुल बदलाव का है।"
— Kabeer Ji Maharaj का call to action | युवा शास्त्रार्थपूर्ण Transcript — युवा शास्त्रार्थ
नीचे Kabeer Ji Maharaj के युवा शास्त्रार्थ session का सम्पूर्ण, verbatim transcript है — शोधकर्ताओं, अध्येताओं और इस material को गहराई से पढ़ने के इच्छुक सभी के लिए।
Kabeer Ji Maharaj — युवा शास्त्रार्थ | पूर्ण Transcript
भया फोन मत लेना है। दो — अब जैसे-जैसे हम अपनी जिंदगी को देखें, तो हम एक पड़ाव पे हैं। आप 25 साल के हो गए। 25 साल एक अच्छी age मानी जाती है — लगभग 25 साल से नीचे तो कोई नहीं होगा यहां पे। सभी लोग ऊपर ही होंगे।
25 साल में बहुत सारी संभावनाओं पर हमें पहुंच जाना चाहिए था, है ना? आज अगर गौर से देखो, मुआयना करो हम सब अपनी-अपनी जिंदगी का — तो हमारा एकमात्र लक्ष्य है कि हमें अपनी आर्थिक मजबूती को सुधारना है। लक्ष्य है — मैं यहां यह नहीं बोलूंगा कि पैसा कुछ नहीं होता है, पैसे की तरफ मत जाओ — लेकिन हमारा लक्ष्य क्या है? पैसा है, है ना? इसके अलावा हमारा कोई लक्ष्य नहीं है।
किसी भी तरीके से हमें कोई या तो job अच्छी मिल जाए, किसी भी तरीके से या तो हमारा कोई व्यापार अच्छा हो जाए, या कोई हम पर कृपा कर दे, कोई हमारा हाथ खींच ले, है ना — कोई हमें ऊपर की तरफ ले आए, किसी तरीके से कोई support कर दे, किसी group का हम हिस्सा बन जाएं, किसी संस्था का हिस्सा बन जाएं — लेकिन ultimately हमारे दिमाग में एक ही चीज चलती है कि हम लोगों को पैसे कमाने हैं।
और पैसे क्यों कमाने हैं? जीवनयापन के लिए — कि हमारे पास सारी सुख-सुविधाएं होनी चाहिए, शक्ति का experience होना चाहिए, जितनी भी luxury है दुनिया में — वीर भोग वसुंधरा — वसुंधरा पर जितने भी भोग हैं, वह वीरों को मिलना चाहिए। और वीर हम तभी कहलाएंगे जब हमारे पास अर्थतंत्र अच्छा हो।
अच्छा — कोई भी काम जिंदगी में, चाहे पैसा कमाना हो, चाहे इस भी वार्ता में आप लोग आए हो — क्या बिना आपकी समझ को apply किए हुए, आप किसी भी चीज में participate कर सकते हो? नहीं कर सकते।
अगर हम आज जिस भी परिस्थिति में हैं — अगर हमें सच में करोड़ों रुपए मिल भी जाएं — तो आपको क्या लगता है कि हम किस स्थिति में होंगे उसके बाद? क्या उससे बेहतर होंगे? और वो एक करोड़ रुपए जिंदगी में क्या कर सकता है? सुधार देगा हमें — ऐसा लगता है।
लेकिन आप अगर गौर से जितने भी लोगों को एकदम से पैसा मिला है — क्योंकि लक्ष्मी जी की सवारी कौन होती है? उल्लू होती है। जब लक्ष्मी जी की सवारी उल्लू है, तो जब भी आपके पास instant money आएगा, आप उल्लू बनना शुरू हो जाएंगे। इसीलिए लक्ष्मी जी की सवारी उल्लू है।
तो हमारी जितनी भी अपने काम को लेकर, पढ़ाई को लेकर, job को लेकर, पैसों को लेकर जो हमारी approach है — वह direct पैसे पर है। हम पैसा hit करना चाहते हैं। लेकिन अगर पैसा अकेला ही सब कुछ कर सकता, तो बहुत सारी चीजें आप हासिल कर चुके थे।
पैसा चाहिए — हमें पैसे तक पहुंचना है — लेकिन पैसे तक पहुंचने के लिए आपको कुछ न कुछ रास्ते तय करने पड़ेंगे। वह रास्ते कैसे तय करोगे? समझ से, है ना।
तो अभी हम सबका जिंदगी का जो structure है, वह reverse है। हम पैसे को target कर रहे हैं, पैसे से शक्ति को target कर रहे हैं, और शक्ति से ज्ञान को target कर रहे हैं। यही तो है — इसका मतलब है कि हम देवी की उपासना भी उल्टे क्रम में कर रहे हैं।
हम पहले लक्ष्मी जी की उपासना कर रहे हैं, फिर दुर्गा माँ की उपासना कर रहे हैं, फिर हम सरस्वती माँ की — जिसके पास basic sense नहीं है जिंदगी का, वह आगे कैसे बढ़ेगा?
जो वर्तमान conditions हैं — इस परिस्थिति में आप जो भी काम कर रहे हो — क्या मशीनें उस काम को कर सकती हैं?
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का मतलब क्या है? कि हमारे पास जो Human Intelligence थी — Human Intelligence की सबसे बड़ी capability क्या थी? कि हम अपनी जिंदगी में programs बना सकते थे। आपको गाड़ी चलाना सीखना है — आपने program बना लिया, अब गाड़ी चल रही है, आपको कोई फर्क नहीं पड़ता। Machine हम सबसे सीख रही है।
Generative Intelligence ने सारी creativity को खत्म कर दिया। AI ने programming को खत्म कर दिया। Designing sense को खत्म कर दिया। Automatic video create कर सकते हैं — आपका चेहरा और आपकी आवाज चाहिए — कोई भी video बन सकता है, किसी भी भाषा में बन सकता है।
3D Printing से क्या हुआ? कि आप कुछ भी create कर सकते हो। Factory की factory में हजारों जहां पे employees होते थे — पूरी की पूरी factory automate हो गई। वहां पे robots आते हैं, equipment को उठाते हैं, install करते हैं, assembling करते हैं। Automatic drive होना शुरू हो गया — 24/7 काम करते हैं।
आपकी क्षमता कितनी है काम करने की? 12 घंटे भी बहुत होते हैं — हम नहीं करते। छह-सात घंटे तो हम अंगूठा घिसते हैं। Labour-centric जितने भी काम हैं, वह धीरे-धीरे machine कर लेगी। आज गाड़ी चलाने के लिए driver की जरूरत है, कल driverless car हो जाएंगी। आज delivery के लिए delivery boy की जरूरत है, कल drone delivery हो जाएगी।
Permanent job पूरी तरीके से खत्म। Government job निकालेगी नहीं — क्योंकि काम कहीं है ही नहीं — सारे काम machine करेगी।
तुम्हारी generation के साथ सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि तुम देख ही नहीं सकते कि अगले छह महीने में दुनिया कहां जा रही है। हर दिन machine सीख रही है, हर दिन machine इतना सीख ले रही है — इतना competition generate हो जा रहा है, नया program आ जा रहा है, नई skill आ जा रही है — कि हमारे काम खत्म हो जा रहे हैं।
Bill Gates या जितने भी Elon Musk हैं — इन सभी की बहुत बड़ी study है। यह लोग बोलते हैं कि आपको देखने की जरूरत है कि 5 साल बाद, 10 साल बाद दुनिया किस तरफ जा रही है। आप उस तरफ देखना या सोचना शुरू कर दो — आप successful हो जाओगे।
तो ऐसे में अगर हम सबको मजबूत होना है — हमें watchful रहना पड़ेगा। दुनिया बदल रही है, तो हम भी alert हो जाएं, जागरूक हो जाएं। जो-जो नई technology आ रही है, पता तो होना चाहिए आपको।
आपकी देश की economy क्या है? देश की GDP क्या है? 2024-25 में — लगभग ₹77 लाख करोड़ के आसपास है। ₹77 लाख करोड़ की economy में आप-हम सबका योगदान क्या है? हम tax pay करते हैं — indirect taxes pay करते हैं।
कितनी आबादी है आपके देश की? सवा 150 करोड़ होगी आराम से। यह आपकी देश की economy है — दुनिया में 5th Largest Economy है। 5th Largest Economy में जो control है — कितने लोगों के पास है? 1%। हमारी 40% wealth को control करते हैं। और जो 10% हैं, वो 90% economy control कर रहे हैं। केवल भारत के 16 लोग — केवल 16 लोग — 60 करोड़ लोगों से ज्यादा उनकी wealth है। हम कहां stand करते हैं?
Business के नाम पर हम उनके instruments बने हुए हैं। Job के नाम पर हम उनके गुलाम हैं। वो machine की — वो बताती है कि order आपको pick हो गया — उसको receive करो और जाकर deliver कर दो। Drone कर देगा।
जो छह-सात घंटे हम लोग अंगूठा घिसते हैं — फायदा किसको है? 60 लाख करोड़ की लगभग industry हो रही है digital marketing की। वो बेचते क्या हैं? वो हमारे और आपके impressions ही तो बेच रहे हैं। Engagement is the product।
ऐसे में अगर आप थोड़ा सा भी इस बात को समझ पा रहे हो — यह समय आपके लिए बिल्कुल बदलाव का है। या तो आप खत्म हो जाओगे, या इस पर सवार हो जाओगे।
माँ सरस्वती की सवारी क्या है? सफेद हंस। हंस कहां उड़ता है? ऊंचाई पर उड़ता है, stable उड़ता है, long distance उड़ता है। माँ सरस्वती वो हैं जो ऊपर से सब देख रही हैं — स्पष्ट, निष्पक्ष। जिस दिन तुम्हें सारी चीजें स्पष्ट दिख जाएंगी — तुम उस काम को बेहतर करोगे।
जिस समझ को हम इस तरीके से use कर रहे हैं — अगर उस पर हमने काम करना शुरू कर दिया — अभी हमारे पास एक सवाल का जवाब नहीं था — अस्तित्व खतरे में आ गया — कि हम सनातनी क्यों हैं। कभी हमने अपने आप से पूछा ही नहीं।
सनातन का मतलब क्या होता है? Eternal। एक धारा निरंतर बह रही है, जो प्राचीनतम से प्राचीनतम और नवीनतम से नवीनतम है — जो हर स्थिति में, हर परिस्थिति में शाश्वत है।
सनातन धर्म को जिन स्थितियों में compile किया गया, उनको हम वेद बोलते हैं। सबसे प्राचीन जो हमारा वेद है — ऋग्वेद। बाद में उसकी व्याख्या हुई — यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद। ऋग्वेद को श्रुति बोला गया है। श्रुति का मतलब — सुना हुआ। जो ऋषि बहुत ध्यान की अवस्थाओं में होंगे — उन्होंने बहुत छोटी-छोटी frequencies को पकड़ा होगा, जो हम अपने कान से नहीं सुन सकते।
स्मृति — वेदों के ज्ञान को अलग-अलग तरीके से व्याख्या किया गया। मनुस्मृति में 16 संस्कार दिए हैं। पहले अंगिरा जी ने 33 संस्कार दिए थे। मनु जी ने उस समय के हिसाब से 16 संस्कार दिए। और 16 संस्कार बहुत वैज्ञानिक हैं — कुछ भी पाखंड नहीं है।
पुराण कहानियां हैं — लेकिन उनके अंदर एक hidden message है — encrypted है — जिसको समझने के लिए विशेष अध्ययन की जरूरत पड़ेगी।
आगम में यह बताया गया है कि मंदिरों की प्राण प्रतिष्ठा कैसे होती है — geometrically, astronomically — क्या-क्या चीजें ध्यान में रखनी पड़ेंगी मंदिर बनाने से पहले।
इन सारी की सारी knowledge को हमारे ऋषि-मुनियों ने दर्शनों में incorporate किया है। जो भी व्यक्ति सनातन दर्शनों का अध्ययन किया है, जो भी सनातन दर्शनों को शाश्वत मानता है, या उनके ऊपर विश्वास रखता है, या उनके अध्ययन से गुजरा है — वह सनातनी कहलाता है।
अब धर्मो रक्षति रक्षिता। धर्म के अनुकूल चलेंगे, तो हम उसके सहयोगी हो जाएंगे। धर्म आपके लिए सहयोगी हो जाएगा। धर्म के विपरीत चलोगे — धर्म आपको मार देगा।
चाकू होता है — चाकू का गुणधर्म है। आप उसको फल काटने के लिए भी use कर सकते हो, गला काटने के लिए भी। छत पर खड़े होकर कूदो — यही gravitational force आपको मार देगा। और यही gravitational force के हम सहयोगी हैं, तो सबको बिठा के रखा हुआ है।
माँ दुर्गा का नाम क्यों माँ दुर्गा है? दुर्ग — दुर्ग का मतलब fortress, दुर्ग का मतलब दीवार — चारों तरफ किला, किलाबंदी। किले को Warriors protect करते हैं। एक शेर होता है — शेर जिस area में रहता है, उस area में कोई जाता है क्या?
तो अगर हम सबको शेर बनना है — तो ऐसी समझ विकसित करो कि आसपास के लोगों को mobilize कर सको, आसपास के संसाधनों को mobilize कर सको।
और जब हमारे पास समझ है, शक्ति है — माँ लक्ष्मी की कृपा आपके ऊपर होगी या नहीं होगी? होनी ही है। समझ के काम करने से ही पैसा आता है।
इसका मतलब — हमारी approach उल्टी है। थोड़ा सा हमें बस समझ के साथ अपनी power को develop करना है और आगे बढ़ जाना है।
अगर हमने अपनी समझ को विकसित नहीं किया — या तो आप खत्म हो जाओगे, या इस पर सवार हो जाओगे। यह समय आपके लिए बिल्कुल बदलाव का है। करना पड़ेगा कि नहीं करना पड़ेगा? सबसे पहले हम सबको पता होना चाहिए कि हम सब क्यों सनातनी हैं।
सरस्वती → दुर्गा → लक्ष्मी — यही एकमात्र क्रम है।
समझ विकसित करो। Technology को ride करो।
समाज को सहयोगी बनाओ। सनातन को जानो।
धर्म के साथ लयबद्ध हो जाओ —
बाकी सब अपने आप ठीक होता है। 🙏
"या तो आप खत्म हो जाओगे, या इस पर सवार हो जाओगे।" — Kabeer Ji Maharaj