Kabeer Ji Maharaj — Lucknow Sahkarita Bhawan में गेंदे-सजे podium पर keynote | Shakti Samman 2025 | Sanatan Sanskar Yatra
जुलाई 2025 में Lucknow के Sahkarita Bhawan में एक ऐतिहासिक कार्यक्रम हुआ — शक्ति सम्मान 2025। 100 से अधिक संस्थाओं की प्रतिनिधि महिला समाजसेविकाओं के बीच Kabeer Ji Maharaj ने मुख्य अतिथि के रूप में वह keynote दिया जो आज के युवा संकट, AI के खतरे और Aatmik Intelligence की अनिवार्यता को एक साथ सामने रखता है।
🌸 शक्ति दर्शन — शिव शक्ति के बिना शव हैं
Kabeer Ji Maharaj ने एक गहरे सनातन सत्य से शुरुआत की — हम कहीं जाते नहीं, बुलाए जाते हैं, भेजे जाते हैं। परम आदेश (महादेव का आदेश) ही हमारी सारी गतिशीलता को संचालित करता है।
शिव में 'इ' की मात्रा शक्ति है। जब शक्ति हट जाती है — शिव शव हो जाते हैं।
बिना शक्ति के पूरा ब्रह्मांड, पूरी संरचना dormant और निर्जीव हो जाती है।
"बिना शक्ति के कोई भी गतिविधि नहीं। इसलिए शक्ति का सम्मान होना, शक्ति का अभिसूप होना नितांत आवश्यक है।"
— Kabeer Ji Maharaj, Shakti Samman 2025, Lucknow🏆 शक्ति सम्मान — महिला समाजसेविकाओं का अभिनंदन
इस कार्यक्रम का आयोजन Priya Mishra ने किया था। 100 से अधिक संस्थाओं को आमंत्रित किया गया था। हर संस्था का उद्देश्य था — गरीबों की मदद, शिक्षा, भोजन, समाज सेवा। Kabeer Ji Maharaj ने सभी के सामने एक प्रश्न रखा: इन सब प्रयासों को direction कैसे मिले?
"जब हमारे पास उद्देश्य होता है तो हमारी पूरी गतिविधि को एक दिशा मिलना शुरू हो जाती है। हम सबकी नैतिक जिम्मेदारी है कि इस पीढ़ी को बचा लें।"
— Kabeer Ji Maharaj🤖 AI का खतरा — Aatmik Intelligence ही असली उत्तर
Kabeer Ji Maharaj और Anand Dwivedi — Sanatan Sanskar Yatra 2025 में नमस्कार | Lucknow Sahkarita Bhawan
Kabeer Ji Maharaj ने AI को एक technology नहीं, एक intelligence बताया। और यही इसे खतरनाक बनाता है। Human intelligence जैसे अनुभव से सीखती है, ठीक वैसे ही AI भी learn करती है — लेकिन exponentially तेज।
"यह कोई technology नहीं है — यह Intelligence है। यह आपसे सब कुछ छीन लेगी। आपके गाने की, लिखने की, शारीरिक क्षमता — सब। भविष्य इतना सामान्य नहीं है।"
— Kabeer Ji Maharaj, Shakti Samman 2025📉 24 साल से कम उम्र के युवा — एक राष्ट्रीय संकट
Kabeer Ji Maharaj ने एक alarming data सामने रखा: जब हम 24 साल के थे और आज के युवा जब 24 साल के हैं — उनकी मानसिक और शारीरिक क्षमताओं में जमीन-आसमान का फर्क है।
24 साल से कम उम्र के बच्चों को कोई कंपनी काम नहीं देना चाहती। ये नई कोशल विकसित करने में असक्षम हैं। छोटी सी criticism पर job छोड़ देते हैं। Discipline खत्म, Shakti खत्म, Aatmik Intelligence नहीं।
"15 साल का बच्चा अगर आत्महत्या कर रहा है तो इसका मतलब है कि 15 साल में उसने पूरी दुनिया देख ली। 15 साल में उसे देखने और करने के लिए कुछ नया बचा नहीं।"
— Kabeer Ji Maharaj🏘️ हमारा जनपद हमारा उत्पाद — विकेंद्रीकरण का विज्ञान
💡 Hamara Janpad Hamara Utpaad — The Formula
जैसे Made in India ने China से import कम किया — वैसे ही Made in Raibareli, Made in Jaunpur जैसे जनपद-स्तरीय production और consumption से क्रांति आ सकती है।
100 संस्थाएं × 5,000 reach = 5,00,000 लोगों तक वैचारिक क्रांतिएक अगरबत्ती उद्योग = कई सौ करोड़ की industry। केवल local production + local consumption से हजारों रोजगार।
"जनपद स्तर पर अगर local production और local consumption शुरू हो जाए — तो छोटे-छोटे विकेंद्रीकृत units उद्योग की नींव बनेंगे। यही है असली विकास।"
— Kabeer Ji Maharajसरकार के पास रोजगार पैदा करने का कोई माध्यम नहीं है। इसीलिए Universal Basic Income (free food) की तरफ जा रही है — क्योंकि AI jobs खत्म कर देगी। लेकिन केवल पेट भरने से creativity नहीं बढ़ती। इंसान को ऐसा काम चाहिए जो उसकी रचनात्मकता बढ़ाए।
📜 पूर्ण Transcript — Kabeer Ji Maharaj | Shakti Samman 2025 | Lucknow Sahkarita Bhawan (Part 1 + Part 2)
राधे राधे राधे राधे हर हर महादेव हर महादेव आप सभी का बहुत-बहुत सादर अभिनंदन और बहुत अच्छा लग रहा है कि लगभग 100 से ज्यादा संस्थाओं को और संस्थाओं के प्रतिनिधियों को प्रिया ने यहां पर आमंत्रित किया और उन सभी प्रतिनिधियों के साथ में मुझे भी यहां सबसे मिलने का, सबसे रूप होने का मौका मिला है। मेरा ऐसा मानना है और मेरे पूरे जीवन का अनुभव है कि हम कोई भी काम करते हैं या कहीं पर भी जाते हैं तो उसमें हमारा श्रेय बहुत कम होता है।
जैसे यहां आने का हम सबको मौका मिला। हो सकता है हमें लग रहा हो कि हम आए हैं लेकिन हम कहीं जाते नहीं है बुलाए जाते हैं भेजे जाते हैं। हम सभी कहीं ना कहीं परम आदेश के अधीन है। बोलते है ना आदेश महादेव तो वो आदेश है जो हमें सब जगह संचालित करता है। हमारी सारी स्थितियों को संचालित करता है। हमारी जितनी भी गतिशीलता है उसको संचालित करने के लिए परम आदेश है।
उस परम आदेश का सहयोग हमें बिना शक्ति के सहयोग के नहीं मिलता। हम लोगों ने सुना है ना शिव और शक्ति जब शक्ति नहीं होती जो शिव शिव के ऊपर इ की छोटी सी मात्रा है जब वो हट जाती है तो क्या हो जाता है? शिव शव हो जाते हैं। तो बिना शक्ति के पूरा ब्रह्मांड पूरी संरचना अपने आप में डोरेंट हो जाती है। निर्जीव हो जाती है। शक्ति का हमारे जीवन में आना, शक्ति का हमारे जीवन में संचालित होना और शक्ति का हमें सहयोग मिलना नितांत आवश्यक है।
अगर हमारे पास शक्ति नहीं होगी तो क्या कोई भी गतिविधि हम कर पाएंगे जीवन में? नहीं कर पाएंगे। इसलिए शक्ति का सम्मान होना, शक्ति का अभिसूप होना बहुत जरूरी है। इसी क्रम में इसी श्रंखला में शक्ति सम्मान जो कार्यक्रम है आज वो तमाम शक्तियों को प्रेरणा देने के लिए है। वो शक्ति जो स्वरूपा है उनके माध्यम से जो भी गतिविधि जो भी क्रियाशीलता चलाई जा रही है उसको आगे बढ़ाने के लिए उसको मंच देने के लिए है कि वह मुख्य धारा में आ सके और वह एक जगह पर पहुंच सके जिस जगह पर उनको पहुंचना है।
आज हम सभी यहां पर बैठे हैं जितने लोग भी यहां पर बैठे हैं जो भी संस्थाएं हम चला रहे हैं उन संस्थाओं का कोई ना कोई उद्देश्य तो है। उद्देश्य यह भी हो सकता है कि हम गरीबों की मदद करना चाहते हैं। उद्देश्य यह भी हो सकता है कि हम शिक्षा को आगे बढ़ाना चाहते हैं। उद्देश्य यह भी हो सकता है कि हम अपने माध्यम से बहुत सारे लोगों को लाभान्वित करना चाहते हैं।
भूखों को खाना खिलाना चाहते हैं। लेकिन जब हमारे पास उद्देश्य होता है तो हमारी पूरी की पूरी गतिविधि को एक दिशा मिलना शुरू हो जाती है। जी मैं आज मुझे समय मिला है जो भी पांच 10 मिनट आपसे बात करने का मैं आपका ध्यान एक ऐसी समस्या के ऊपर ले आना चाहता हूं जिस समस्या को या तो हम देख नहीं रहे हैं या हमें वो दिख नहीं रही है या हम नजरअंदाज करते चले जा रहे हैं इतनी व्यापक और गंभीर समस्या है कि हम सबके प्रयास भी मिल जाए तो उससे निजात पाने के लिए कम पड़ेंगे वो समस्या यह है कि हमारे सामने बहुत बड़ा एक विकराल स्वरूप बन के आता चला जा रहा है।
आपको अंदाजा नहीं होगा शायद हम अपने बच्चों को आज देखते हैं जो 24 साल से कम उम्र के हमारे बच्चे हैं। हम जब 24 साल के थे और आज वो जब 24 साल या उससे कम की उम्र में है तो उनकी मानसिक और शारीरिक क्षमताएं और हमारी और मानसिक शारीरिक क्षमताओं में कितना अंतर था? जमीन आसमान का अंतर था। यह जो क्षमताएं उनकी धीरे-धीरे कम होती चली जा रही है।
इसके परिणाम बहुत घातक होते चले जा रहे हैं। पिछले साल के आंकड़े हैं कि लगभग 8000 बच्चों ने जो 15 साल से कम उम्र के थे उन्होंने आत्महत्या कर ली। अब 15 साल का बच्चा अगर आत्महत्या कर रहा है तो इसका मतलब है कि 15 साल में उसने पूरी दुनिया देख ली। 15 साल में उसको देखने के लिए कुछ नया बचा नहीं। 15 साल में अब उसको करने के लिए कुछ बचा नहीं।
ऐसा क्यों हो रहा है? अगर यह समस्या है तो इस समस्या के मूल कारण क्या है? यह समस्या अपने आप खत्म हो जाएगी यह समस्या और बढ़ने वाली है क्योंकि हम जो भी है हम जो भी करना चाहते हैं हम अपने लिए नहीं अपनी आगामी पीढ़ी के लिए करना चाहते हैं। अगर हमारी आने वाली पीढ़ी कमजोर हो जाए मानसिक रूप से असक्षम हो जाए तो क्या यह दुनिया यह समाज व्यवस्थाएं ये धर्म ये राजनीति सुचारू रूप से चल पाएगा नहीं चल पाएगा अब इस समस्या का कारण क्या है कारण की कह में हमें जाना बहुत जरूरी है यहां पे आप देख रहे होंगे प्रिया से जब मेरी बातचीत हुई तो प्रिया से मैंने दो चार बातें कही कि प्रिया सबसे बड़ी समस्या जो समाज के सामने है एक तो भविष्य रोजगार जो 24 साल से कम उम्र के बच्चों को बोल रहे हैं इनको कोई कंपनी आज काम नहीं देना चाहती।
कोई इनको रोजगार नहीं देना चाहता और ये खुद भी कोई काम नहीं कर सकते। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि ये स्थिर नहीं है। यह नई कसर को विकसित करने में असक्षम है। कंपनीज में जाते हैं तो कंपनी में इनका डिसिप्लिन रहता है। इनसे कोई कुछ कोई कुछ छोटी सी बात कह देता है तो ये बुरा मान के कंपनी छोड़ के चले आते हैं। और हो सकता है हम हर घर में ये समस्या को अपने देख रहे होंगे कि हमारे बच्चे भी कुछ इसी तरीके के होते चले जा रहे हैं।
भविष्य में ये समस्या बहुत विकराल स्वरूप लेने वाली है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का शब्द आपने सभी लोगों ने सुना होगा सुना है कि नहीं सुना है? ये जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस है हमें कहीं ना कहीं लगता इंटेलिजेंस क्या कर लेगी? ए आई आ भी गया तो हमारे जीवन में क्या परिणाम हो सकते हैं? क्या रिजल्ट होंगे? हमारा जीवन तो जैसा चल रहा है वैसा चलता रहेगा।
क्योंकि कोई ना कोई आदमी तो पीछे कंट्रोल कर ही रहा होगा। लेकिन मैं यहां पे आपको रोकना चाहता हूं। थोड़ा सा आगाह करना चाहता हूं कि जो तकनीकी क्षमता विकसित होती चली जा रही है यह इंटेलिजेंस है। यह कोई टेक्नोलॉजी नहीं है। इंटेलिजेंस क्या होता है? इंटेलिजेंस का मतलब है कि वो हर एक अनुभव से सीखता है। आज हम जो भी कुछ हैं, आप जो भी कुछ हैं, आप जो भी कुछ हैं, यह आपके अनुभवों का परिणाम है।
ह्यूमन इंटेलिजेंस कैसे ग्रो होती है? ह्यूमन इंटेलिजेंस बढ़ने का तरीका होता है कि जब भी आप किसी अनुभव से गुजरते हैं तो आपके दिमाग में जो करोड़ों न्यूरॉन्स हैं वो एक कॉम्बिनेशन बनाते हैं। एक सॉफ्टवेयर की तरह काम करते हैं और वो उस अनुभव के हिसाब से अपनी क्षमता को विकसित कर लेते हैं। ये जो तकनीकी क्षमता विकसित हो रही है ये बिल्कुल उसी तरीके से विकसित होती चली जा रही है।
और ये इतनी खतरनाक होती चली जा रही है कि ये आपसे सब कुछ छीन लेगी। आपके अंदर जो भी कौशल है आप गाना गा सकते हैं या आपसे गाना गाने की क्षमता छीन लेगी। आप अच्छा लिख सकते हैं या आपसे वो क्षमता छीन लेगी। आप शारीरिक क्षमता से कोई काम कर सकते हैं। सब कुछ आपसे छीन लिया जाएगा। भविष्य इतना सामान्य नहीं है। पिछली जितनी भी तकनीकों का उदय हुआ है उसके लिए 10 साल, 20 साल, 25 साल लगे हैं।
लेकिन यह जो तकनीकी विकसित हो रही है इसको 10 साल, 20 साल, 30 साल नहीं लगने वाली। आपको नहीं लगता कि हर काम जब दूर से होने लगे आप केवल उपभोक्ता बन के रह जाओगे तो आपकी कला आपकी कौशलता आपके पास रह ही नहीं गई। नहीं लगता कि हमें विकेंद्रीकरण की तरफ सोचना चाहिए। आज हमारी जितनी भी समस्याएं हैं उसका सबसे बड़ा कारण ये है केंद्रीयकरण।
आज हर काम सेंट्रलाइज होना शुरू हो गया है। तो दो तीन मुद्दों पर मैं संज्ञान में आपके लाना चाहता हूं। सबसे पहले तकनीकी जागरूकता अगर हमने युवाओं को हिलाया नहीं युवाओं को समझाया नहीं कि तकनीकी का उदय हो रहा है इसके साथ सामंजस्य बिठाओ। पुरानी शिक्षा पद्धति आपके काम नहीं आने वाली। आपको नए तरीके से सीखना पड़ेगा। नए तरीके से काम करना पड़ेगा।
दूसरा उनके लिए भविष्य उन्मुखी होके रोजगार का सृजन करना हम सबको सम्मिलित रूप से करना पड़ेगा। अगर हमने अपने बच्चो के लिए रोजगार की नई संभावनाएं नहीं खोली। तो भविष्य पूरा का पूरा खतरे में है। ऐसी स्थिति में है कि भविष्य को संभालना हमारे लिए बहुत मुश्किल हो जाएगा। इसीलिए विचार है हमारा जनपद हमारा उत्पाद जैसे हमने चाइना से आयात निर्यात कम करने के लिए मेड इन इंडिया को प्रमोट किया मैं चाहता हूं हम अपना ध्यान एक जगह ले आए जब हम रायबरेली में बैठे होंगे हम जौनपुर में बैठे होंगे अगर वहां पे जनपदी स्तर पर एक भावना को विकसित किया जाए कि मेड इन रायबरेली को हम सबसे पहले बढ़ावा देंगे रायबरेली जनपद में जितने भी उत्पाद बन रहे हैं जो लोग उत्पाद बना रहे उस उत्पाद को आगे बढ़ाना और उस उत्पाद का उपभोग करना लोकल लेवल पे मतलब स्थानीय उत्पादन को बढ़ाना और स्थानीय उपभोग को बढ़ाना इससे बहुत सारी संभावनाएं निकल के आएंगी।
सबसे पहले तो स्थानीय लेवल पर कार्यकर्ता और इंडस्ट्रलाइजेशन का उदय होना शुरू हो जाएगा जो छोटी-छोटी यूनिट होगी। जिसको हम डिसेंट्रलाइज यूनिट भी बोल सकते हैं, विकेंद्रीकरण भी बोल सकते हैं। तो इस विषय पर जो भी आप लोग काम कर रहे हैं तो जरूर सोचिएगा कि हमारा जनपद हमारा उत्पाद लोकल लेवल पर हम लोगों को सशक्तिकरण दे सकता है। हम जिस भी जनपद में या जो भी सहयोग हम कर सकते हैं कोई धूप बत्ती बना रहा है।
कोई कुछ और प्रोडक्ट बना रहा है या कोई हस्त शिल्प उसमें है कोई कौशल विकसित कर रहा है। उनको स्थानीय लेवल पर अपनी संभावनाओं को विकसित करने के लिए सहयोग सहयोगी होना चाहिए। तो एक विचार है कि हमारा जनपद हमारा उत्साह जिसपे हम सबको चिंतन भी करना चाहिए और इसको कैसे आगे बढाया जाए इस सब पे काम करना चाहिए। तो मेरा आवाहन है यहां पर बैठे सभी संस्थाओं से और उन संस्थाओं के प्रतिनिधियों से कि हमारा जनपद हमारा उत्पाद ये जो कार्यक्रम है ये बहुत बहुआयामी है इसमें इतने बड़े स्तर पर आप रोजगार पैदा कर सकते हैं कि आप कल्पना नहीं कर सकते एक छोटा सा एग्जांपल ले लेते हैं हमारे सभी के घरों में धूप बत्ती का प्रयोग होता है लेकिन आपको अंदाजा नहीं होगा कि कितने करोड़ इंडस्ट्री की कितने करोड़ रुपए की इंडस्ट्री यह कई सौ करोड़ की इंडस्ट्री है और अगर केवल धूप बत्ती औरों से जो प्रोडक्ट बनते हैं वो लोकल लेवल पर बनना और लोकल लेवल पर कंजम होना शुरू हो जाए तो बहुत बड़ी क्रांति क्षेत्र में आ सकती है केवल एक प्रोडक्ट से हजारों बच्चों को रोजगार मिल सकता है जो केवल तीन तरह के काम करने शहर में आते हैं या तो ड्राइवर बनने आते हैं या गार्ड बनने आते हैं या डिलीवरी बॉय बनने आते हैं।
इसके अलावा कोई रोजगार नहीं है। सरकारों के पास कोई साधन नहीं है कि वो आपके लिए रोजगार पैदा कर सके। ना ही भारतीय जनता पार्टी और ना भविष्य में कोई भी सरकार आएगी उसके पास कोई माध्यम ऐसा नहीं है कि रोजगार पैदा कर सके क्योंकि कुछ है ही नहीं करने के लिए। मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूं कि जब सरकार फ्री में खाना बांट रही है तो सरकार की दृष्टि बहुत दूर तक है।
सरकार सोच पा रही है कि हमें यूनिवर्सल बेसिक इनकम की तरफ जाना पड़ेगा क्योंकि रोजगार नहीं रहेंगे भविष्य में। हमें हर परिवार को सहायता देनी पड़ेगी। लेकिन केवल सहायता से हमारा काम नहीं चलेगा। सहायता का तो मतलब ऐसा हुआ कि पेट भर गया और काम हो गया। लेकिन ह्यूमन है तो ह्यूमन पॉसिबिलिटी के साथ खड़ा होता है। तो उसको ऐसा काम भी चाहिए जिससे उसकी रचनात्मकता बढ़े।
तो हमारा जनपद हमारा उत्पाद एक बहुत बड़ा विकल्प हो सकता है। आप सभी से आवाहन है निवेदन है कि जो ये मुहिम या जो विचार है इस विचार पर चिंतन, मनन और प्रयास किए जाने चाहिए। तो क्या इसमें हम सभी लोग सम्मिलित होकर प्रयास कर सकते हैं? अगर कर सकते हैं तो एक बार आपकी कर्तम ध्वनि की आवाज बहुत तीव्र उसको सुनाई देनी चाहिए। दूसरा विषय मैं बहुत ज्यादा समय नहीं लूंगा।
कार्यक्रम शुरू होना है आगे बढ़ाना है। लेकिन हर कार्यक्रम का कुछ ना कुछ उद्देश्य होना चाहिए। हम कार्यक्रम में आए हैं। कार्यक्रम में आपके कार्यों को सराहना मिलनी चाहिए। अप्रिसिएशन मिलना चाहिए। लेकिन उससे कोई ना कोई एजेंडा निकल के आना चाहिए। आज यहां पर लगभग 100 के आसपास संस्थाएं हैं। अगर कम से कम आंकड़े भी ले ले तो एक संस्था की रीच लगभग 5000 लोगों तक तो होगी।
अगर 100 संस्थाएं 5000 लोगों तक पहुंचती है तो 100 * 5000 कितना होता है? लगभग 5 सात लाख लोगों तक पहुंच जाएंगे हम आराम से। पहुंचेंगे कि नहीं? तो अगर 5 लाख लोगों को प्रभावित करने की क्षमता केवल और केवल इस हॉल में है तो अगर हम इस प्रयास को व्यापकता देने की कोशिश करें तो हो सकता है कि पूरे प्रदेश में और देश में एक वैचारिक क्रांति आ सकती है और वैचारिक क्रांति छोटे से प्रयासों से होती है।
छोटी सी सोच से होती है। तो हमें अपने से बेहतर सोचने की जरूरत है कि आज हम सब की नैतिक जिम्मेदारी है कि इस पीढ़ी को बचा ले। हमारी नैतिक जिम्मेदारी है कि इस पीढ़ी को कुछ ऐसा दे चले जाए कि इनका भविष्य कम से कम इतना हो जाए कि कुछ कर पाए। हमारे पास विकल्प थे इनके पास विकल्प नहीं है। हमारे पास संभावनाएं थी इनके पास संभावनाएं भी नहीं है।
हमारे पास करियर ऑप्ट करने के लिए सरकारी नौकरियां ऑप्ट करने के लिए चॉइस इनके पास वो भी चॉइससेस नहीं है। तो हमारा जनपद हमारा उत्पाद इस विचार पे हम लोग चाहेंगे कि प्रिया मिश्रा जो नेतृत्व कर रही है पूरा का पूरा आयोजन उनका है। तो प्रिया से मेरा निवेदन है कि जो भी संगठन है हम वापस से दोबारा से एक हॉल में बैठ के इस विषय पर मंथन करें और आगे कैसे काम कर सकते है उसपे काम करें।
दूसरा तकनीकी जागरूकता आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विषय में आप सबको पढ़ना चाहिए। आप सबको इसके लिए खुद जागरूक होना चाहिए और बच्चों को आगाह करना चाहिए कि इसके बारे में तुम समझो और सीखो। भविष्य एजेंटिक एआई की तरफ जा रहा है। एजेंटिक एआई का मतलब कि हमारे बिहाफ में कौन काम कर रहा है? हम जब आगे बढ़ेंगे अभी पांच साल का प्रोजेक्शन है एलॉन मस्क जो बड़े बड़े एआई के जनक हैं ये बोलते हैं कि अगले पांच साल में आर्टिफिशियल सुपर इंटेलिजेंस आ जाएगा जो आपसे आपसे आपसे हम सबसे 10,000 गुना ज्यादा ताकतवर होगा 10,000 गुना एक ह्यूमन इंटेलिजेंस से 10000 टाइम्स बेटर होगा वो ह्यूमन उस समय पे हम क्या करेंगे तो बहुत जरूरी है कि इस विषय पे हम चिंतन करें और आगे आगे बढ़े इस विचार को हम समझे सोचे और अपने भविष्य को जो हमारी युवा पीढ़ी है इसको सिखाए और दिशा दे आगे कार्यक्रम के संचालन के लिए मैं अपनी वाणी को विराम देता हूं और जो मंच होस्ट कर रहे हैं प्रदीप जी को मैं निवेदन करके बुलाना चाहता हूं कि आगे कार्यक्रम का संचालन करें और जिस उद्देश्य से हम यहां पर आए हैं इस कार्यक्रम में प्रतिभागी बने हैं उस उद्देश्य को एक दिशा दिया आप सभी का बहुत-बत धन्यवाद।
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निष्कर्ष — शक्ति का सम्मान, Aatmik Intelligence और हमारा जनपद
Kabeer Ji Maharaj का यह keynote तीन स्तरों पर काम करता है — दर्शन (बिना शक्ति के शव), चेतावनी (AI आपसे सब छीन लेगी) और समाधान (हमारा जनपद हमारा उत्पाद)। Aatmik Intelligence वह आंतरिक शक्ति है जो कोई machine नहीं ले सकती। इसे जगाना — यही Vichar Se Vyavastha Tak का मूल उद्देश्य है।