Kabeer Ji Maharaj on Jyotish — ज्योतिष भय नहीं, बोध का विज्ञान है। समय · चेतना · कर्म · समाधान।
YouTube पर ज्योतिष की बाढ़ आ गई है। राशि, गोचर, शनि साढ़ेसाती — हर कोई भविष्यवाणी कर रहा है। लेकिन Kabeer Ji Maharaj एक क्रांतिकारी प्रश्न उठाते हैं: क्या ज्योतिष वास्तव में भाग्य-फल का जाल है, या यह एक गहरा नाद विज्ञान है जो ब्रह्मांड की ध्वनि-आवृत्तियों को मनुष्य के जीवन से जोड़ता है?
ज्योतिष — पहला Predictive Science
आज के युग में हम हर advanced technology को तब श्रेष्ठ मानते हैं जब वो भविष्य को predict कर सके। Google Maps बताता है कि अगले 8 किलोमीटर बाद ट्रैफिक कितना होगा। AI आपकी खरीदारी की आदत से अगला सुझाव देता है। लेकिन Kabeer Ji Maharaj कहते हैं — यही काम सबसे पहले ज्योतिष ने किया था।
"ज्योतिष वो पहला एकमात्र विज्ञान था जिसने भविष्य की तरफ आपको भविष्योन्मुखी कर दिया। आप संभावनाओं को कैलकुलेट कर पाए।"
— Kabeer Ji Maharajइतिहास केवल सूचना नहीं — इतिहास में patterns हैं, cycles हैं। ज्योतिष ने उन्हीं patterns को decode किया। जब यह विज्ञान अपने चरम पर था, यह केवल भविष्यवाणी नहीं, बल्कि एक complete system of self-knowledge था। हर जन्म से मृत्यु तक की संभावनाओं का गणित।
नाद से ब्रह्मांड — ध्वनि का महाविज्ञान
सनातन संस्कृति का fundamental foundation है — नाद। नाद का अर्थ है वो विशाल ध्वनि, वो गर्जना जिसे हम शिव की गर्जना कहते हैं। शिव ने नाद किया — और तभी प्रकृति अस्तित्व में आई। उसी से नक्षत्र, तारे, ग्रह और हमारा पूरा सौरमंडल बना।
Kabeer Ji Maharaj at Divya Ashram — नाद और ध्वनि-विज्ञान पर गहन चिंतन और प्रवचन
Kabeer Ji Maharaj एक आधुनिक scientific parallel खींचते हैं — हमारा पूरा existence sound-centric है। जब आपका प्रिय गाना बजता है तो चाल बदल जाती है, energy boost होती है। आधुनिक science भी confirm करती है कि सही frequency पर रखे जाने से aging reverse हो सकती है। यही सनातन ऋषियों ने हज़ारों साल पहले जाना था।
साउंड के तीन स्तंभ — त्रिगुण और ब्रह्मा-विष्णु-महेश
Kabeer Ji Maharaj एक अद्भुत सूत्र देते हैं — साउंड तीन चीजों से बनती है: Reverberation (कंपन/वाइब्रेशन), Energy (ऊर्जा), और Frequency (आवृत्ति)। और यही त्रिगुण है — सात्विक, राजसिक, तामसिक। इन्हीं तीनों को हमने ब्रह्मा, विष्णु, महेश कहा।
"ब्रह्मांड का अस्तित्व हुआ है संकल्प से, सहयोग से, समर्पण से। ब्रह्मा ने संकल्प लिया — विष्णु ने सहयोग दिया — शिव ने समर्पण को पूर्ण किया।"
— Kabeer Ji Maharaj| Sound तत्व | त्रिगुण | देवत्व | सिद्धांत |
|---|---|---|---|
| Reverberation (वाइब्रेशन) | राजसिक | ब्रह्मा | संकल्प — Creation का बीज |
| Energy (ऊर्जा) | सात्विक | विष्णु | सहयोग — Sustenance की शक्ति |
| Frequency (आवृत्ति) | तामसिक | महेश (शिव) | समर्पण — Transformation का मार्ग |
जन्मकुंडली — आपका Sound Software
जब मनुष्य पैदा होता है, उस विशेष क्षण में हर ग्रह एक निश्चित angle पर होता है, एक निश्चित ध्वनि-आवृत्ति पर होता है। उन सभी ध्वनियों के बीच व्यक्ति की अपनी ध्वनि बनती है — यही उसका Sound Software है, यही जन्मकुंडली है।
"तुम्हारा सॉफ्टवेयर अलग है। तुम्हारी आवाज अलग है। तुम कहीं पर जाओगे तो इनकी तरह बात नहीं करोगे — क्योंकि इनका साउंड अलग है।"
— Kabeer Ji Maharajलग्न से व्यक्तित्व जानते हैं। चंद्र राशि से मनोदशा (psyche) जानते हैं। सूर्य राशि से logic और बुद्धि जानते हैं। लेकिन असली integrated analysis केवल आपकी own horoscope से होती है। YouTube पर राशि-वार generalizations से नहीं। तीनों का composite ही real jyotish है।
मंत्र — Sound Healing का वैज्ञानिक तंत्र
जब ऋषियों ने समझा कि व्यक्ति एक ध्वनि है और उसकी ध्वनि में ग्रह-असंतुलन है, तो उन्होंने solution ढूंढा — Sound Healing। शनि की ध्वनि से आपकी ध्वनि को problem है? तो शनि मंत्र दो। वो sound alignment करेगा।
संस्कृत को Kabeer Ji Maharaj "The Language of Sound" कहते हैं — यह बोलचाल की भाषा नहीं थी, healing की भाषा थी। संस्कृत का हर एक शब्द एक बीज मंत्र है। अलग-अलग permutations और combinations से अलग-अलग मंत्रों की व्याख्या हुई। मंत्र से ही तंत्र होता है — बिना मंत्र के कोई तंत्र संभव नहीं।
ज्योतिष की आज की दशा — Superficial vs. Deep Science
Kabeer Ji Maharaj एक कड़वी सच्चाई कहते हैं — आज ज्योतिष बहुत superficial हो गई है। केवल गोचर देख लेते हैं, moon sign या lagna पर YouTube videos बना लेते हैं। लेकिन composite analysis — जो व्यक्ति की अपनी जन्मकुंडली का integrated study है — वो नहीं हो रहा।
"ज्योतिष एकमात्र ऐसा विज्ञान है जिसको कोई accept नहीं करता और सब मानते हैं। Socially reject — Personally believe। यही इसकी सबसे बड़ी विडंबना है।"
— Kabeer Ji Maharajयह science इतना revenue generate करता है, इतने लोगों को रोजगार देता है — फिर भी academically marginalized है। Kabeer Ji Maharaj इसे एक बड़ा contradiction मानते हैं जिसे समझने की जरूरत है।
📜 पूर्ण Transcript — Kabeer Ji Maharaj on Jyotish Vigyan
महाराज जी दिव्य नमः महाराज जी आजकल YouTube से ले सोशल मीडिया से ले एस्ट्रोलॉजी का बहुत ज्यादा स्कोप हो रहा है और लोग देख रहे हैं बहुत ज्यादा शायद बिलीव भी कर रहे हैं। लेकिन बस मैं ये जानना चाह रहा था क्या ये एक्चुअल में एस्ट्रोलॉजी उस तरीके से काम करती है इंसान की लाइफ में जिस तरीके से हम लोग चाहते हैं या हमारे साथ सिचुएशंस हैं। जब हम एस्ट्रोलॉजी की बात करते हैं तो हम बहुत सारी पॉसिबिलिटीज को देखते हैं क्योंकि केवल एस्ट्रोलॉजी नहीं देख रहे होते हैं।
हम यह देखना चाहते हैं कि हमारा पूरा भविष्य कैसा होगा? हमारे पास जो पैसे आएंगे वो पैसे कितने आएंगे? कब आएंगे? हम ऐसा क्या काम करेंगे जो हमारे जीवन का आधार बन जाएगा? हमारे बच्चे कैसे होंगे? हमारा जो पार्टनर है जिसके साथ हमारी शादी होगी पति या पत्नी जो भी हो वो कैसी होगी उसके साथ हमारा जीवन अच्छा चलेगा कि नहीं चलेगा हमारा व्यापार कैसा होगा हमारे आसपास की परिस्थितियां कितनी होगी कितना अलग होगा तो केवल बहुत दूर की संभावनाएं नहीं हम पास की भी चीजें ज्योतिष से जानने की कोशिश करते हैं कि आज हम घर से बाहर निकलेंगे तो आज का दिन कैसा रहेगा आज हम कोई काम करेंगे तो हम कितने सक्सेस होंगे कितने कितने फेल होंगे, कितने चांसेस हैं।
हम सारी चीजों को ऑब्जर्व करना शुरू कर दिए। होता क्या है कि इतिहास हमें बहुत सारी चीजें सिखाता है और इतिहास में केवल इंफॉर्मेशन नहीं है। इतिहास में पैटर्न्स है, तरीके हैं। जो चीजें घूमती है पहले चीजों का धीरे-धीरे इवोल्यूशन होता है। इवोल्यूशन के बाद उनका अप्शन बढ़ता है। मतलब हम उनको जब उन्नत होती है तो हम उनको यूज करना शुरू कर देते हैं। जब हम यूज करना शुरू कर देते हैं तो शुरुआती जो हमारा यूज केसेस होते हैं वो टेक्नोलॉजी साइंस सबको समझ के होते हैं कि हमने यह चीज किस तरीके से इवॉल्व हुई इसका ये रेलेवेंस है।
धीरे धीरे धीरे धीरे धीरे परिस्थिति के साथ समय के साथ जो हम सीखते हैं जो हम समझते हैं वो धुंधला हो जाता है। और वो ब्राइट हो जाता है जो हम मानना शुरू कर देते हैं। क्योंकि उस समय जानने की कोई जिज्ञासा नहीं रहती। हमारे पिताजी कर रहे थे। हमारे पिताजी के पिताजी इस चीज को ऐसे कर रहे थे। तो यह ठीक ही है। यह रेलेवेंट ही है। एस्ट्रोलॉजी के साथ भी कुछ ऐसा हो गया है।
जब ये तकनीक या ये जो विज्ञान था ये जो उन्नत हुआ ये अपने चरम पे था। यह पहला एकमात्र ऐसा साइंस था जिसने भविष्य की तरफ आपको भविष्योन्मुखी कर दिया। आप फ्यूचर सेंट्रिक हो गए। आप भविष्य को देखने की कला विकसित कर पाए। आप संभावनाओं को कैलकुलेट कर पाए। आज के समय में अगर आप जितनी भी तकनीकी देखो वो तकनीकी को हम एडवांस इसलिए बोलते हैं क्योंकि भविष्य को प्रेडिक्ट कर देती है।
आप सड़क पे जाते हो। आप देखना चाहते हो कि अगले 8 कि.मी. बाद ट्रैफिक का रूट क्या रहेगा? आप दिल्ली जाओगे तो दिल्ली रास्ते कितनी देर पहुंचोगे? कितना ट्रैफिक मिलेगा? क्या हो रहा है यहां पे? प्रेडिक्शन हो रहा है। लगातार प्रेडिक्शन हो रहा है। और कोई भी तकनीकी है वो केवल और केवल प्रेडिक्शन पे ही काम कर रही है। वो कैच करना चाहती है कि आप कहां पहुंचोगे। वो कैच करना चाहती है कि आप जाओगे तो हम रास्ता पहले दे देंगे, साफ कर देंगे।
प्रॉब्लम्स को बता देंगे, एनालिसिस करके दे देंगे। यही तो तकनीकी करती है। यही काम एस्ट्रोलॉजी ने किया। और इसी उद्देश्य के साथ एस्ट्रोलॉजी का पूरा का पूरा इवोल्यूशन क्योंकि हम साइंस की तरह देखते हैं ना। साइंस का मतलब क्या होता है? साइंस का मतलब होता है टू नो जानना। और जानना किसे कहते हैं? कि जो चीज हमें नहीं पता हो। जहां पे एकदम से डार्कनेस हो और एक ब्राइटनेस आ जाए।
यही एस्ट्रोलॉजी का मूल था। एस्ट्रोलॉजी की फाउंडेशन इतने पहले शुरू हो गई थी कि शायद हम लोग कल्पना भी नहीं कर सकते। अगर सनातन संस्कृति को समझे तो सनातन संस्कृति का जो फाउंडेशन है वो नाथ को बोला गया है। नाथ का मतलब क्या है? एक बहुत बड़ा साउंड एक इतना तगड़ा रोल इतनी गर्जना जिसको हम शिव की गर्जना बोलते हैं। शिव ने नाद किया था। तभी प्रकृति अस्तित्व में आई।
इसका मतलब है नाद जो शब्द है वो नाद का मतलब क्या हुआ? साउंड ही तो हुआ। किसी ने कोई आवाज निकाली। उस आवाज से ब्रह्मांड की उत्पत्ति हो गई। उसी से नक्षत्र बन गए। उसी से तारे बन गए। उसी से ग्रह बन गए। उसी से आपका पूरा का पूरा सोलर मंडल बन गया। पृथ्वी जैसे प्लनेट बन गए। छोटे-छोटे एलिमेंट बन गए। ये सारा हमने देखा। अगर हम उसको केवल थ्योरी ले कि चलो ये एनालिसिस है या एक मिस्टेसिस्म है।
एक ऐसी चीज है जिसका कोई हमें साइंटिफिक एवोल्यूशन नहीं मिलता। लेकिन एक चीज तो समझ में आती है आज हमें कि हमारा पूरा का पूरा एकिस्टेंस साउंड पे डिपेंड करता है। ध्वनि केंद्रित है। तुमने महसूस किया होगा कि नहीं किया होगा लेकिन अनुभव में एक बात जरूर तुम्हारे आई होगी जब तुम कहीं जाते हो और अचानक से कोई ऐसा गाना जो तुम बहुत प्रिय हो और बजना शुरू हो जाता है।
तुम्हारी चाल बदल जाती है। तुम्हारी बॉडी के रेवरबेशन बढ़ जाता है। सेंसेशन बदल जाता है। सब कुछ चेंज हो जाता है। बदलता है कि नहीं बदलता है। तुम कुछ भी ऐसा काम करते हो अचानक से कोई ऐसी आवाज आती है जिसको आवाज को सुनकर तुम्हें बहुत अच्छा लगता है। तुम्हारी एनर्जी एकदम से क्या होती है? बूस्ट अप हो जाती है। होती है कि नहीं होती? वही रहे होते हैं और एकदम से स्पीड बढ़ने लगती है।
गाना सुनते ही गाना सुनते ही स्पीड बढ़ जाता है। एनर्जी लेवल बढ़ जाता है। तो साउंड के चेंज करने मात्र से इंसान पूरी तरीके से चेंज हो जाता है। इवन अभी रिसेंट जो साइंटिफिक एक्सप्लोरेशन है उसमें आपका जो पूरा का पूरा फेस है अगर आपको सही फ्रीक्वेंसी में रखा जाए तो आप एजलेस हो सकते हो। आप अगर 60 इयर्स के हो और सही फ्रीक्वेंसी में हो, सही एनवायरमेंट में हो तो आपकी ऐ कई साल कम आपसे दिखना शुरू हो जाएगी।
जस्ट बिकॉज़ ऑफ़ साउंड। अच्छा रिवर्स हो सकती है। रिवर्स रिवर्स एज हो सकती है, रुक भी सकती है। कुछ भी पॉसिबल है साउंड के साथ। अगर फ्रीक्वेंसी हमारी बॉडी से मैच करती है तो वो एक हर इस पे भी इस जो ये जो पूरा का पूरा विज्ञान है इस पर काम हुआ है। बहुत काम हुआ है। फ्रीक्वेंसी साइकिल्स बनाई गई है। ओके? जिसको साउंड थेरेपी बोलते हैं। साउंड थेरेपी से ही सारे जितने मंत्र आए हैं जो भी मंत्र को हम रेबेट करते हैं वो सब साइंटिफिक एवोल्यूशन है।
एक सर्टेन कॉम्बिनेशन है स्ट्रक्चर का। तो इतने प्रमाण है हमारे पास जहां पे साउंड से इतनी बड़ी-बड़ी बीमारियां हील हो गई जिनकी लोगों ने कल्पना भी नहीं कर सकती। और फिर देखा जाए तो केवल साउंड का मतलब ध्वनि नहीं होता है। साउंड अपने आप कास्टटुएंट्स है। कुछ चीजों से मिलके बना है। अब साउंड जैसे मैं बोल रहा हूं मैं जो बोल रहा हूं ये आवाज आप तक पहुंच रही है। आपको एहसास हो रही है, सुनाई भी दे रही है।
ये जो साउंड है जो ध्वनि निकल रही है किसी भी आवृत्ति से कहीं से भी चाहे वो एसी चल रहा हो, चाहे बाहर गाड़ियां चल रही हो, ध्वनि हो रही है। लगातार कहीं ना कहीं कुछ ना कुछ बन रहा है। यह दोनों ही है तीन चीजों से मिलके बनती है। रेवरबेशन, एनर्जी और फ्रीक्वेंसी। रेवरबेशन को हम वाइब्रेशन भी बोल सकते हैं। कंपन होता है आपने ऑडियोग्राम में देखा होगा वेव्स चलती हैं।
है ना? वो क्या होगी? फ्रीक्वेंसी डिटरमाइन कर रही है। वाइब्रेशन है। आप देखो म्यूजिक बजाते हो चीजें हिलने लगती है। गाड़ी चलती है कमने लगती है। वाइब्रेशन भी है। एनर्जी भी है। क्योंकि ये आपको जगा भी रही है। कई साउंड जो वाइबेशंस होती है आप जैसे शिव तांडव स्त्रोतम है। आप एक बार अगर तेज आवाज में इसको पढ़ लो। आप कल्पना भी नहीं कर सकते कि आप कितने पावरफुल हो जाएंगे।
कितनी एनर्जी आपकी बूस्ट हो जाएगी। तो ऐसे ही बहुत सारे कॉम्बिनेशंस बनाए गए। इसका मतलब है कि ये साउंड भी त्रिगुणा है। और अगर आपने ध्यान दिया हो तो पूरी सनातन संस्कृति त्रिगुणा है। त्रि स्वरूप पे बात की गई है हमेशा। वो क्या है? वाइब्रेशन, एनर्जी और फ्रीक्वेंसी। इनहीं को हमने ब्रह्मा, विष्णु, महेश कहा। इन्हीं तीनों प्रकृतियों को हमने क्या कहा है? सात्विक प्रकृति, तामसिक प्रकृति और राजसिक प्रकृति।
रज, तम और सत। इनहीं प्रकृतियों की पूरी की पूरी विस्तार है। इनहीं प्रकृतियों के मूल में ब्रह्मांड का अस्तित्व छुपा है। दार्शनिक रूप से समझने की कोशिश करें तो ब्रह्मांड का अस्तित्व हुआ है संकल्प से, सहयोग से, समर्पण से। किसी ने संकल्प लिया जिसको हम ब्रह्मा बोलते हैं। ब्रह्मा ने संकल्प लिया। ब्रह्म का मतलब क्या होता है? डिवाइन। डिवाइन का मतलब होता है जो प्रकृति है या प्रकृति से परे है या प्रकृति के साथ डिवाइन ब्रह्म है उसने संकल्प लिया उसके मन में जो भी जनक हुआ जो भी विचार बने जो भी चीजें बनी सहयोग मिला सहयोग किसका मिला सहयोग उनके खुद के विचारों का मिला जैसे आप और हम जिंदगी में कुछ भी क्रिएट करना चाहते हैं तो मूल है संकल्प चाहते क्या हो इस इस बात का जवाब ही नहीं है लोगों के पास कि हम चाहते क्या है और अगर आपने मूल समझ लिया तो संकल्प आपको वहीं से मिल गया।
अगर आपको ये क्लियर है कि आप चाहते क्या हो तो आपको यह भी पता होगा कि इस चाहत के लिए हमें कुछ करना पड़ेगा। चलना पड़ेगा। तुम कुछ खाना चाहते हो तो घर से बाहर निकलोगे ना कुछ स्पेशल खाने के लिए। तुम कहीं जाना चाहते हो तो घर से बाहर निकलोगे ना। वो कदम तो तुम्हें बढ़ाना पड़ेगा। उसको बोला है सहयोग। जब आप अपने संकल्प के लिए सहयोग करना शुरू करते हो तो बहुत जो आसपास की परिस्थितियां है हो सकता है शुरुआत में वो सहयोगी ना हो लेकिन जैसे ही आप करते रहते हो लगातार करते रहते हो तो आसपास की परिस्थितियां भी अनुकूल होना शुरू हो जाती है क्योंकि वो उसी वाइब्रेशन में उसी फ्रीक्वेंसी में रेवरबेट करना शुरू कर देती है जहां पे आप होते तीसरा होता है समर्पण क्योंकि बार-बार जब आप कोशिश करते हो बार-बार आप कोशिश करते हो तो आपको हर कदम पर एहसास होना शुरू होता है कि ये जो हम कर रहे हैं यहां पर भी हम नहीं है।
यहां पर भी हमारे थ्रू कोई संकल्प है कोई सहयोग है जो चल रहा है। और धीरे धीरे धीरे धीरे हम उसको समर्पण की तरफ ले जाते हैं। और समर्पण का मतलब होता है कि अब आप फुल्ली इनू हो इनवॉल्व हो। आपके संकल्प में और आप में कोई बीच में गैप नहीं। इसी को भक्ति मार्ग भी बोला गया है कि जब ईश्वर और आप एक हो जाते हो तो भक्ति मार्ग से संचालित की बात अच्छी तो ध्वनि से जब अस्तित्व बना है तो और भी सवाल निकल के आते हैं।
अगर ध्वनि ही सब कुछ है तो हम ऐसे दिखते क्यों है? हर चीज का सोफिस्टिकेशन होता है। जब ह्यूमन रिवोल्यूशन हुआ तो एक कोशिका से हुआ और आज हम इतने सोफिस्टिकेटेड इसका मतलब है कि क्रमिक विकास है। इसी क्रमिक विकास ने बहुत सारी संभावनाओं को चंडित किया। आप किसी डिप्रेसिव आदमी के बगल में बैठो। थोड़ी देर में आप डिप्रेसिव महसूस करना शुरू कर दोगे। इसका मतलब है न्यूरोनल लेवल पे ट्रांसमिट हो रही है चीजें।
आप पर्सव कर रहे हो आपके आसपास की चीजों से। आप लगातार चीजों को ले रहे हो, लगातार एक्सचेंज कर रहे हो। ये साउंड उन चीजों को क्रिएट कर रहा है। इस बात की समझ जो भी हमारे पूर्वज थे, जो ऋषि मुनि थे उनको बहुत पहले आ गई। उन्होंने इस बात को समझा कि व्यक्ति के जीवन में व्यक्ति जब पैदा होता है तो वो एक साउंड ले पैदा होता है। वो एक ध्वनि है। उसकी जो ध्वनि बनती है वो ध्वनि भी इसलिए उसकी बन पाती है क्योंकि वो एक सर्टेन समय पे जिस समय पर हर ग्रह की हर नक्षत्र की एक चाल होती है।
एक एंगल होता है। उसकी एक आवाज होती है। और उन्हीं आवाजों के बीच में ये आवाज बनती है। इसीलिए तो सबका सॉफ्टवेयर अलग है। तो ये आवाज बन गई। सॉफ्टवेयर कह दो। अलग है। तुम्हारा सॉफ्टवेयर अलग है। तुम्हारी आवाज अलग है। तुम्हारा साउंड अलग है। तुम कहीं पर जाओगे तो इनकी तरह बात नहीं करोगे। ये कहीं पे जाएंगे तो तुम्हारी तरह बिहेव नहीं करेंगे। क्योंकि इनका साउंड अलग है।
तुम्हारा साउंड अलग है। सबका साउंड अलग-अलग है। और इतने साउंड्स हैं कि वो अलग-अलग फ्रीक्वेंसी, अलग-अलग वाइब्रेशन पर रेवरबेट होते हैं। यही साउंड को धीरे धीरे धीरे इस बात से समझा गया कि ये आपका हॉरोस्कोप बन गया। अगर मैंने आपके साउंड को समझ लिया, आपकी ध्वनि को समझ लिया, मुझे पता लग गया कि आप किस स्थिति में कैसे रेवबेट करते हो, रिएक्ट करते हो, किस चीज पर क्या आंसर करते हो, किस समय पे क्या ऐसी सिचुएशनंस है कि आप अपनी पूरी ताकत में होते हो, पूरी कैपेसिटी में होते तो बहुत आसान हो जाएगा मुझे इस बात को समझना कि आप क्या हो।
ध्वनि तो समझने की जरूरत है। इस बात को समझा गया। ये तो समझ में आ गया कि ध्वनि है। इस ध्वनि के साथ चैलेंजेस है। हर ध्वनि, हर साउंड, हर सॉफ्टवेयर जो इंसान के रूप में आ रहा है, जानवर के रूप में आ रहा है, उसके लाइफ के चैलेंजेस है। उसकी लाइफ की पॉसिबिलिटी है। वहीं पे आप देखते हो कोई बहुत अच्छे से खेल रहा है। बिल्कुल बिल्कुल उसकी जिंदगी में सारी चीजें लग्जरियस है।
सब कुछ उसके पास है। वहीं पे आप देख रहे हो अपनी स्थिति को कि आप चैलेंजेस से गुजर रहे हो। या किसी और को देख रहे हो वो और ही ज्यादा बुरी बुरी स्थिति में हो। उसकी जिंदगी में ऐसी पॉसिबिलिटीज क्यों आती है? यह क्या है? क्योंकि अगर परेशानी है, अगर साउंड है तो इस साउंड को प्रॉब्लम हो रही है। यह बात तो नियत है। अगर ब्रह्मांडीय साउंड बना है, ब्रह्मांडीय ध्वनि बनी है तो ब्रह्मांडीय ध्वनि के कारण आपकी ध्वनि बन रही है।
क्योंकि अगर ध्वनि है ब्रह्मांड अगर हम इस बात को थोड़ा सा एनालाइज करें तो हमारी ध्वनि बनी है और हमारी ध्वनि में भी कहीं ना कहीं चैलेंजेस आ रहे हैं। इन्हीं चैलेंजेस को समझने के लिए बहुत जरूरी था कि हम पहले ब्रह्मांडीय तालमेल को समझे क्योंकि आप एक अकेली इकाई नहीं हो। यू आर नॉट अ सिंगल यूनिट। आप इकाई नहीं हो। आप इंटीग्रेटेड हो, पार्ट हो, अभिन्न हिस्सा हो।
जैसे आपके एक एक कोशिका आपके पूरे शरीर का हिस्सा है ना वैसे आप पूरे ब्रह्मांड के साथ आपका तालमेल बैठना बहुत जरूरी है। अगर आपको जिंदगी में आनंदित होना है, सफल होना है। अब ब्रह्मांडीय तालमेल क्या है? ब्रह्मांडीय तालमेल भी तो समझना जरूरी था। नहीं तो बहुत दिक्कत आ जाती। जैसे तुमने सवाल पूछा था कि एक ध्वनि है जिसको हम बोलते हैं नाग है। है ना? उसको ओम की ध्वनि लगभग बोला जाता है।
ओम की तरह साउंड करती है। अब ओम को भी देखो तो ओम भी तीन तलों पर है। आ उ तीनों साउंड है। और तीनों ऐसे साउंड है जो अनाहत है। इन साउंड को उच्चारण करने पे कुछ भी आहत नहीं होता। इवन आपकी जीभ भी आपके तालु से नहीं टकराती। केवल यही दुनिया ऐसी है जिनको हम अनाहत बोलते हैं। अनाहत में ही विश्राम हो सकता है। अनाहत के साथ आपका तालमेल अगर हो गया तो फिर आप बहुत ही कम है संभावना ऐसी कि आपको कोई आहत कर सके।
अब ब्रह्मांड ध्वनि को समझा। लेकिन ये तो ब्रह्मांड की ध्वनि है ना। आपकी ध्वनि बनने में आपको बहुत सारे चैलेंज है। सबसे पहले तो हम अभी समझे हैं। शाब्दिक है। यह तो शाब्दिक व्याख्या है कि ब्रह्मांड के अनुभव में तो नहीं है। आपके अनुभव में तो हर एक ग्रह की अपनी एक गर्जना है। हर एक तारे की अपनी गर्जना है। नक्षत्रों के समूह की अपनी एक ध्वनि है। बहुत सुंदरता।
27 नक्षत्रों को कैलकुलेट किया। सोलर सिस्टम्स की जितनी भी लाइफ थी उनके लिए 27 नक्षत्र नौ ग्रह और सूर्य सोलर सिस्टम में इन सारे प्लनेट्स को प्रॉपर्ली स्टडी किया गया पूरे के पूरे नौ ग्रहों को जिसमें सूर्य को भी इंक्लूड किया गया 27 नक्षत्रों के साथ और इस पूरी आवृत्ति को इतने अच्छे से समझा गया पूरी व्याख्या को इतने अच्छे से समझा गया कि इसको बहुत ही वैज्ञानिक तरीके से एक कागज पर उतारने में हम सक्षम हो पाए।
इस बात को समझ पाए कि शनि की भी कोई ध्वनि हो सकती है। अगर ध्वनि में दिक्कत है तो इसका समाधान किसके पास होगा? ध्वनि के पास होगा। अगर आप एक साउंड हो साउंड को परेशानी क्यों आ रही है? क्योंकि साउंड अलाइन नहीं है। अगर उसको अलाइन करना है तो क्या करना पड़ेगा? उसको साउंड हीलिंग देनी पड़ेगी। यहां से निकल के यहीं से पूरा साइंस डेवलप होना शुरू और फिर एक ऐसी भाषा का जन्म हुआ जो बोलचाल के लिए नहीं थी वो थी हीलिंग के लिए द लैंग्वेज ऑफ साउंड जिसको हम संस्कृत बोलते हैं।
संस्कृत बोलचाल का बोलचाल की भाषा नहीं थी। संस्कृत इज द लैंग्वेज ऑफ साउंड। एक एक शब्द संस्कृत का बीज मंत्र है अपने आप में। इनहीं का परमटेशन एंड कॉम्बिनेशन अलग-अलग आवृत्तियों से अलग-अलग मंत्रों की व्याख्या की गई। आपका साउंड समझ के पता लगा कि आपको शनि के जो आवृत्ति है शनि का जो स्पंदन है उससे दिक्कत हो रही है। आपको शनि का मंत्र दिया गया। आप केवल मांत्रिक रेमेडी से अलाइन होते हैं।
मंत्र के कारण ही तंत्र होता है। सर अगर मंत्र नहीं हो तो कोई तंत्र नहीं हो सकता। मंत्र से ही इस तंत्र में सुधार हो सकता है। इन चीजों की समझ पड़ गई। रेमेडीज मिलना शुरू हुआ। समस्या और बढ़ने लगी आगे क्योंकि हम स्यूशन पर पहुंच रहे हैं ना आगे धीरेधी। जैसे जैसे हम समाधान की तरफ बढ़ते हैं तो हमें और सोफिस्टिकेशन चाहिए पड़ता है। क्योंकि समझदारों से ना समझो की तरफ बढ़ती है चीजें।
जैसे विकास होता है अर्बन से रूरल की तरफ होता है। रूरल से अर्बन कभी नहीं होता। वैसे ही जो विज्ञान होता है विज्ञान भी जो साइंटिफिक दृष्टि रखते हैं उनसे जो नॉन साइंटिफिक लोगों की तरफ होता है। जब वो नॉन साइंटिफिक लोगों की तरफ जा रहा था जो केवल विश्वास कर सकते हैं। उनके लिए बड़ा मुश्किल था इस बात को समझ पाना इन चीजों को समझ पाना। जरूरी था कि वो सरेंडर करें।
अगर आप सरेंडर नहीं करोगे। किसी में आपकी आस्था नहीं होगी तो आप उस चीज तक पहुंच ही नहीं पाओगे। यहीं से सारा योगा यहीं से सारा कर्मकांड बनना शुरू। और सबसे पहला जो योग की विधि थी वो नमस्कार थी। पहली बार नमस्कार एक ऐसा विज्ञान बन गया जो बहुत सूक्ष्म स्तर पर आपके अंदर के शिव शक्ति यन और सारी ऊर्जाओं को कैलिब्रेट कर सकती थी। आपके अंदर एक स्पंदन महसूस कर सकती थी।
आपके अंदर जो ऊर्जाओं का प्रभाव है जिसको हम पूरा का पूरा नाड़ी तंत्र बोलते हैं। 72,000 72000 क्रमों में विभाजित होती थी 108 केंद्रों में डिवाइड 108 चक्र इनके सात चक्रों पे हम बात करते हैं मूलाधार से सहस्त्र उन सारे चक्रों पे इन्होंने काम करना शुरू कर दिया। एलाइनमेंट करना शुरू कर दिया। पहली बार हमें एक ऐसा विज्ञान मिला जो भविष्य की संभावनाओं को हमें दिखा पा रहा था कि यह है अगर यह ध्वनि शनि की आपको जन्म के समय मिली है तो इस समय पे आप ऐसी ऐसी परिस्थिति ऐसी मनोदशा में जरूर रहेंगे।
उसमें भी बहुत दीप विज्ञान हुआ। लग्न के ऊपर काम हुआ कि आपका व्यक्तित्व कैसा होगा जो चंद्र राशि के ऊपर काम हुआ। मनोदशा कैसे होगी? साइकी के बिना दुनिया ही एडजस्ट नहीं करती। है ना? आपके लॉजिक बुद्धि के ऊपर काम हुआ जिसको हम सूर्य सन साइन जिसको बोलते हैं तो ऐसी बहुत सारी चीजों पर काम हुआ। ये पूरा का पूरा ज्योतिष और एक बहुत बड़ा बहुत बड़ा विज्ञान है। अब आज की दशा में देखें तो बहुत सुपरफिशियल खेलते हैं।
गोचर देख लेते हैं। आपको बस यह पता लग जाए कि आपकी कौन सी राशि है और बहुत सारे लोग प्रवचन दे भी रहे हैं कि कोई मून साइन पे प्रवचन दे रहा है। YouTube पे कोई लग्न के ऊपर आधारित विश्लेषण दे रहा है। लेकिन जो कंपोजिट एनालिसिस है जो इंटीग्रेटेड एनालिसिस है वो आपके खुद के हॉरोस्कोप से ही हो सकता है और दैट इजेंट और बहुत सारे मायनों में ज्योतिष इंपॉर्टेंट है।
ज्योतिष को हम बिल्कुल इग्नोर नहीं कर सकते। ये एकमात्र ऐसा साइन है जिसको कोई एक्सेप्ट नहीं करता और सब मानते हैं। सोशली कोई एक्सेप्ट नहीं करता बट पर्सनली सब मानते हैं। ये एक ऐसा पूरा का पूरा विज्ञान है जिसके लिए इतने ज्यादा केंद्रित मतलब इतना रेवेन्यू जनरेट करता है। इतने सारे लोगों को रोजगार देता है की आप गलत काम कर
📺 Daily Discourse Playlist
Kabeer Ji Maharaj के सभी Daily Discourse videos एक जगह
▶ Playlist देखें — YouTubeनिष्कर्ष — ज्योतिष भय नहीं, बोध का विज्ञान है
Kabeer Ji Maharaj का यह प्रवचन ज्योतिष को एक नई दृष्टि से देखने पर मजबूर करता है। यह न अंधविश्वास है, न केवल fate-telling। यह नाद विज्ञान है — ब्रह्मांडीय ध्वनियों और व्यक्तिगत ध्वनि के बीच तालमेल की प्राचीन और वैज्ञानिक पद्धति। जन्मकुंडली आपका sound software है। मंत्र healing का माध्यम है। और ज्योतिष — सबसे पहला predictive science।